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SHRIDHYANश्री ध्यान आश्रम • हिमालयी तपोभूमि
50 वर्षों की सतत हिमालयी साधना•प्रत्येक बैच में केवल 25 स्थान सीमित•उत्तरकाशी, हिमालय

अथर्ववेद की प्राचीन उपचार विद्या सीखें — 50 वर्षों के प्रत्यक्ष साधना अनुभव पर आधारित

अथर्ववेद (काण्ड 4, सूक्त 13) पर आधारित प्रामाणिक वैदिक बायो-हीलिंग का अध्ययन करें। पांच दशकों की सतत साधना और प्रत्यक्ष अनुभव से उपजी हस्त, प्राण एवं प्राण-ऊर्जा की पारम्परिक विधियों को जानें।

7-दिवसीय फाउंडेशन पाठ्यक्रम में भाग लें
50 वर्षों की सतत हिमालयी साधना
Atharvaveda Sukta 13
Guided Practical Sessions
Shridhyan Ashram Himalayan sanctuary
Mathali Tapobhoomi, Uttarkashi

Shridhyan Himalayan Sanctuary

Traditional healing wisdom and meditation rooted in ancient Atharvaveda tradition.

मार्गदर्शक परिचय • प्रामाणिकता एवं विश्वास

50 वर्षों की सतत हिमालयी तपस्या में प्रतिष्ठित

परम पूज्य स्वामी जी महाराज — संस्थापक एवं पथप्रदर्शक, श्रीध्यान आश्रम

Param Pujya Swami Ji Maharaj
Founder & Spiritual Guide

Param Pujya Swami Ji Maharaj

Shridhyan Ashram • Mathali, Uttarkashi

50+
Years Sadhana

आज का युग ऐसे प्रामाणिक आध्यात्मिक मार्गदर्शकों की खोज में है जिनके पास केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि दशकों का प्रत्यक्ष व्यावहारिक अनुभव हो। अथर्ववेद सूक्त (काण्ड 4, सूक्त 13) के पचास वर्षों के निरंतर अनुष्ठान और हजारों साधकों-रोगियों के कल्याणकारी परिणामों ने इस पवित्र ज्ञान-परंपरा को एक सुदृढ़ आधार प्रदान किया है।

पांच दशकों की समर्पित साधना

अथर्ववेद के विशिष्ट सूक्त का पचास वर्षों से अविरल स्वाध्याय, चिंतन एवं पारम्परिक वैदिक ऊर्जा पद्धतियों का गहन अनुभव।

व्यावहारिक अनुभव एवं हजारों का कल्याण

शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन का अनुभव करने वाले हजारों साधकों के प्रत्यक्ष अनुभव और प्रामाणिक संस्मरण।

शुद्ध वैदिक परंपरा का संचरण

शिवाभिमर्शन (स्पर्श द्वारा उपशमन) एवं वात-भेषज (प्राण-वायु की पारम्परिक उपचार शक्ति) जैसी गूढ़ अवधारणाओं का उत्तरदायित्वपूर्ण शिक्षण।

50+
वर्षों की सतत साधना
10,000+
मार्गदर्शित साधक एवं जिज्ञासु
25
प्रति बैच सीमित स्थान
7
पावन अथर्ववेदीय मंत्र
पाठ्यक्रम के प्रमुख लाभ

समग्र जीवन-परिवर्तन हेतु प्राचीन वैदिक प्रज्ञा

व्यक्तिगत कल्याण, पारम्परिक साधना और व्यावसायिक विकास के तीन आयामों में संरचित।

श्वास जागरूकता एवं गहन विश्रांति

प्राण और अपान पर आधारित पारम्परिक श्वास-क्रियाएं सीखें जो तनावमुक्ति, स्नायु-संतुलन और दैनिक थकान को दूर करने में सहायक हैं।

काया-मन की ऊर्जा का बोध

वैदिक प्राण-ऊर्जा की अवधारणाओं को समझकर शरीर की प्राकृतिक पुनर्जनन क्षमता के प्रति अंतर्ज्ञान विकसित करें।

मानसिक शांति एवं आंतरिक स्थिरता

ध्यान, मंत्र-ध्वनि उच्चारण एवं मौन के माध्यम से भावनात्मक संतुलन तथा गहरी मानसिक शांति का अनुभव करें।

चरणबद्ध पाठ्यक्रम संरचना

5 प्रगतिशील शिक्षण चरण (Curriculum Modules)

आधारभूत वैदिक ध्वनियों से लेकर प्रत्यक्ष ऊर्जा-अनुभव तक का व्यवस्थित और सुगम क्रम।

चरण 1

सूक्त अध्ययन एवं ध्वनि विज्ञान

अथर्ववेद (काण्ड 4, सूक्त 13) के सातों पावन मंत्रों का परिचय, पारम्परिक शुद्ध उच्चारण, उनका गूढ़ अर्थ एवं वैदिक उपचार में उनकी भूमिका।

चरण 2

हस्त संवेदनशीलता एवं ऊर्जा जागरण

हथेलियों और अंगुलियों की सूक्ष्म संवेदनशीलता का जागरण तथा 'अयं मे हस्तो भगवान्' (मेरे यह हाथ भगवत्-कृपा से संपन्न हैं) का व्यावहारिक बोध।

चरण 3

प्राण एवं अपान श्वास-साधना

ऊर्ध्वगामी प्राण और अधोगामी अपान ऊर्जा-धाराओं के संतुलन की आधारभूत तकनीकें, जो शरीर में प्राणशक्ति का संचार करती हैं।

चरण 4

शिवाभिमर्शन तकनीक

पारम्परिक स्पर्श-आधारित वैदिक साधना की विधियां, ऊर्जा की शुचिता, उचित मर्यादाएं और सुरक्षित व श्रद्धापूर्ण अभ्यास।

चरण 5

प्रत्यक्ष प्रदर्शन एवं अनुभव अध्ययन

स्वामी जी के 50 वर्षों के साधना अनुभवों पर आधारित प्रत्यक्ष प्रदर्शन, प्रामाणिक केस-स्टडीज और मार्गदर्शित अभ्यास सत्र।

आगामी बैच के प्रवेश खुले हैं
7-दिवसीय गहन प्रशिक्षण • ऑनलाइन एवं आश्रम प्रवास विकल्प

वैदिक हीलिंग परंपरा में अपनी 7-दिवसीय यात्रा आरंभ करें

अथर्ववेद काण्ड 4, सूक्त 13 अनुशीलन • आश्रम परंपरा द्वारा मार्गदर्शित

प्रति बैच केवल 25 समर्पित साधकशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने और प्रत्येक साधक को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु प्रत्येक बैच में स्थान 25 तक सीमित हैं।
प्रतिदिन 90 मिनट का प्रत्यक्ष मार्गदर्शित एवं संवादात्मक सत्र
अथर्ववेद सूक्त 13 की सम्पूर्ण अध्ययन संचिका, मंत्रोच्चार व अनुवाद
घर पर नित्य अभ्यास हेतु प्राण-अपान साधना की मार्गदर्शित ऑडियो
मंत्रोच्चार, हस्त-मुद्रा एवं स्पर्श तकनीक पर व्यक्तिगत समीक्षा
श्रीध्यान आश्रम द्वारा अधिकृत पूर्णता प्रमाणपत्र (Certificate of Completion)
Cohort Enrollment
7-Day Foundation Course

Includes live sessions, manual, practice audio & completion certificate.

आगामी बैच हेतु पंजीकरण करें
प्रामाणिक अनुभव एवं संस्मरण

साधकों एवं विद्यार्थियों के प्रत्यक्ष अनुभव

साधना पूर्ण करने वाले साधकों, चिकित्सकों और योग शिक्षकों द्वारा साझा किए गए वास्तविक संस्मरण।

“स्वामी जी के सान्निध्य में सूक्त का अध्ययन और हस्त-ऊर्जा की अनुभूति ने मेरी आयुर्वेदिक चिकित्सा शैली को एक नई गहराई और शांति प्रदान की।”

डॉ. अनन्या शर्मा

आयुर्वेदाचार्य एवं योग विशेषज्ञ

“प्राण-अपान श्वास क्रिया और शिवाभिमर्शन ने वर्षों के संचित तनाव को शांत कर दिया। 50 वर्षों की तपस्या का तेज हर पाठ में स्पष्ट झलकता है।”

केन्जी ताकाहाशी

ध्यान साधक, टोक्यो

“व्यावसायिकता से बिल्कुल परे, एकदम विशुद्ध और प्रामाणिक ज्ञान। 25 विद्यार्थियों के सीमित बैच के कारण जो व्यक्तिगत ध्यान मिला, वह अद्वितीय है।”

एलेना रोस्तोवा

इंटीग्रेटिव वेलनेस कोच, लंदन

Ethical Responsibility & Clarity

स्पष्ट नीति: आधुनिक जीवन के लिए पारम्परिक ज्ञान

यह पाठ्यक्रम श्वास, ध्वनि-कंपन, ध्यान, स्पर्श और आत्म-जागरूकता से जुड़े पारम्परिक वैदिक सिद्धांतों का अध्ययन कराता है। यह सामग्री बिना किसी अतिशयोक्ति के, पूरी पारदर्शिता के साथ शैक्षिक और सामान्य आरोग्यता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी चिकित्सकीय निदान या एलोपैथिक उपचार का विकल्प नहीं है।

सामान्य प्रश्नोत्तरी (FAQ)

जिज्ञासुओं के प्रमुख प्रश्नों के उत्तर

यह पाठ्यक्रम सभी आत्म-जिज्ञासुओं, ध्यान प्रेमियों, योग शिक्षकों, आयुर्वेद विशेषज्ञों, रेकी साधकों और नए साधकों के लिए खुला है। इसके लिए संस्कृत के पूर्व-ज्ञान की कोई अनिवार्यता नहीं है।
पावन उद्गम एवं दर्शन

एक प्राचीन तपोभूमि की ओर आपका स्वागत है

श्रीध्यान आश्रम उत्तरकाशी के पावन मथाली अंचल में हिमालय की शांत ऊंचाइयों में स्थित एक पावन तपोभूमि है, जो परम पूज्य स्वामी जी महाराज के सान्निध्य व मार्गदर्शन में अभिमंत्रित है।

यहाँ की भूमि तपस्वी संतों और आत्म-जिज्ञासुओं की मौन साधना से अभिमंत्रित है। यहाँ कोई कृत्रिम कोलाहल नहीं, केवल हिमालयी वायु की निर्मलता, देवदार और चीड़ के वनों की शांत छाया और गुरु-कृपा की निरंतर बहती धारा है।

हिमालयी तपोभूमि • मथाली (उत्तरकाशी)

पारम्परिक ध्यान साधना, आंतरिक मौन और अनुभवात्मक योग-चिंतन को समर्पित एक पावन हिमालयी साधना स्थली।

साधनाअभ्यास
ध्यानमनोलीनता
योगएकात्मता
मौनआत्म-शांति
गुरु-परंपरादिव्य धारा
A tranquil stone ashram courtyard in Himalayan quietude

“तपस्या और प्राकृतिक शांति की गोद में आत्मा का पुनर्जन्म होता है।”

हिमालयी तपोभूमि • मथाली (उत्तरकाशी)

प्राचीन तपोभूमि की आध्यात्मिक विरासत

प्रामाणिक परंपरा में प्रतिष्ठित, श्रीध्यान उस हिमालयी भूमि पर स्थित है जो गहन चिंतन, मौन और शाश्वत से एकाकार होने के लिए पूजनीय है।

landscape
पवित्र हिमालयी अंचल

मथाली तपोभूमि

उत्तरकाशी की पावन घाटी में स्थित मथाली अंचल ध्यान, मौन और आत्म-साधना के लिए परम शांत एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है।

natureपवित्र हिमालयी घाटी
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मौन एवं एकांत

साधना एवं आत्म-चिंतन

प्राकृतिक एकांत में अंतर्मुखी होकर आत्म-निरीक्षण, स्वाध्याय और ध्यान की गहन गहराइयों में उतरने के लिए आश्रम परिसर अत्यंत अनुकूल है।

spaगहन ध्यान साधना व चिंतन
park
प्राकृतिक दिव्यता

शुद्ध वातावरण एवं शांति

हिमालयी वायु की निर्मलता, देवदार और चीड़ के वनों की शांत छाया मन की चंचलता को शांत कर चेतना को अंतर्मुखी बनाते हैं।

filter_vintageनिर्मल पर्वतीय शांति
परंपरा और आत्मिक संचरण

गुरु-परंपरा एवं दिव्य गुरु-कृपा

श्रीध्यान पूज्य गुरु-परंपरा की सूक्ष्म आध्यात्मिक उपस्थिति और मार्गदर्शन से जागृत एक जीवंत साधना-धारा के रूप में कार्य करता है।

ॐऋषिकेश की तपोनिष्ठ आध्यात्मिक परंपरा
ऋषिकेश

परम पूज्य योगानन्द जी महाराज

हिमालयी योगी एवं प्रामाणिक तपस्या की परंपरा में पूज्य आध्यात्मिक प्रेरणा।

ऋषिकेश की तपोनिष्ठ आध्यात्मिक परंपरा
Param Pujya Swami Ji Maharaj
पथप्रदर्शक एवं संस्थापक

परम पूज्य स्वामी जी महाराज

श्रीध्यान आश्रम के संस्थापक एवं मार्गदर्शक, प्रामाणिक ध्यान एवं हिमालयी तपस्या को समर्पित।

“50 वर्षों की हिमालयी तपस्या से उपजी प्रामाणिक साधना”
ॐसमर्पण, मौन एवं साधना मार्गदर्शन
आध्यात्मिक मार्गदर्शिका

पूज्या साध्वी राधिका जी

साधकों को ध्यान, योगिक अनुशासन एवं भक्तिमय अंतर्यात्रा के पथ पर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

समर्पण, मौन एवं साधना मार्गदर्शन
॥ मौनं सर्वार्थ साधनम् ॥

“यहाँ मौन भी एक साधना है”

जहाँ शब्द समाप्त होते हैं, वहीं विशुद्ध आत्म-स्थिति का आरंभ होता है। श्रीध्यान में मौन केवल वाणी का विराम नहीं, अपितु अंतश्चेतना का दिव्य जागरण है।

वाक् मौन (वाणी का मौन)•इन्द्रिय मौन (इन्द्रियों का मौन)•मनो मौन (मन का मौन)
स्थान एवं संपर्क

प्रवेश एवं आश्रम संपर्क

7-दिवसीय पाठ्यक्रम में प्रवेश, मास्टरक्लास व आश्रम आगमन हेतु संपर्क करें।

location_onआश्रम स्थान

मथाली (Mathali), उत्तरकाशी जिला, उत्तराखण्ड 249135, भारत। सटीक निर्देशांक: 30.821991° N, 78.609482° E.

mapGoogle Maps पर देखें📍 30.821991° N, 78.609482° E • Mathali, Uttarkashi

near_meकैसे पहुँचें (मार्गदर्शिका)

flight
हवाई मार्ग:

जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (DED) — लगभग 175 किमी। वहाँ से उत्तरकाशी हेतु सड़क परिवहन उपलब्ध है।

train
रेल मार्ग:

ऋषिकेश, हरिद्वार या देहरादून रेलवे स्टेशन, तत्पश्चात मथाली (उत्तरकाशी) के लिए सड़क यात्रा।

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सड़क मार्ग:

उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 34) पर मथाली, उत्तरकाशी में स्थित।

प्रवेश आवेदन एवं संदेश

7-दिवसीय पाठ्यक्रम में प्रवेश या आश्रम संपर्क हेतु संदेश भेजें: